सल्फर डाइऑक्साइड और हाइड्रोजन पेरोक्साइड अपनी अभिक्रियाओं में ऑक्सीकरण और अपचायक दोनों के रूप में कार्य कर सकते हैं,जबकि ओजोन और नाइट्रिक एसिड केवल ऑक्सीकारक के रूप में कार्य करते हैं। क्यों?

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(N/A) $SO_{2}$: $SO_{2}$ में,$S$ की ऑक्सीकरण संख्या $+4$ है। $S$ की ऑक्सीकरण संख्या $-2$ से $+6$ तक होती है। इसलिए,$SO_{2}$ में $S$ की ऑक्सीकरण संख्या बढ़ या घट सकती है,जिससे यह ऑक्सीकरण या अपचायक के रूप में कार्य कर सकता है।
$(b)$ $H_{2}O_{2}$: $H_{2}O_{2}$ में,$O$ की ऑक्सीकरण संख्या $-1$ है। ऑक्सीजन की ऑक्सीकरण संख्या $0$ ($O_{2}$ में) तक बढ़ सकती है या $-2$ ($H_{2}O$ या $OH^-$ में) तक घट सकती है। इस प्रकार,$H_{2}O_{2}$ ऑक्सीकरण और अपचायक दोनों के रूप में कार्य कर सकता है।
$(c)$ $O_{3}$: $O_{3}$ में ऑक्सीजन की ऑक्सीकरण संख्या $0$ है। यह केवल $-1$ या $-2$ तक अपचयित हो सकता है। इसलिए,यह केवल ऑक्सीकारक के रूप में कार्य करता है।
$(d)$ $HNO_{3}$: $HNO_{3}$ में नाइट्रोजन की ऑक्सीकरण संख्या $+5$ है,जो इसकी अधिकतम ऑक्सीकरण अवस्था है। इसलिए,यह केवल अपचयित हो सकता है,जिसका अर्थ है कि $HNO_{3}$ केवल ऑक्सीकारक के रूप में कार्य करता है।

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